कोई पास आए तो हम जानेंकोई ताल्लुक़ निभाए, तो हम बात रखेंयूँही बे-सबब लिख रहे हैं शेरकोई सुनने आए, तो हम बात रखें छाँव में बैठे हुए लोग, तकते हैं मुझेवो धूप में दो घड़ी आएँ, तो हम बात रखेंझेल रहे हैं एक अरसे से सितम ज़माने केकोई मदद का हाथ बढ़ाए, तो हम बात रखें
ज़रूरी नहीं कि कोई हाल पूछे हमसेवो कुछ अपनी बीती बतलाए, तो हम बात रखेंबसर हो रही है ज़िंदगी एक वीराने मेंकोई हवा गुज़र जाए तो हम बात रखें ये रिश्तों के दावे तो महज़ फ़रेब हैं दरारकोई सच में हमसे पूछे, तो हम बात रखें
~दरार