मुझसे न पूछ मेरी ज़िंदगी क्या हैहर चीज़ में मेरी रज़ामंदगी क्या हैये मेरे ज़ख़्म हैं, और मेरे ख़याल हैंइसमें है सुकून मेरा, इन्हीं में मेरी थकान है
~दरार
मुझसे न पूछ मेरी ज़िंदगी क्या हैहर चीज़ में मेरी रज़ामंदगी क्या हैये मेरे ज़ख़्म हैं, और मेरे ख़याल हैंइसमें है सुकून मेरा, इन्हीं में मेरी थकान है
~दरार