daraar.

शेर

हमराह बनके जो चलेनज़र फेरो तो कहाँ नज़र आते हैं फ़िज़ा में ज़हर-ए-नफ़रत घोलने वालेदोस्ती का सबब भी साथ लाते हैं समझ बैठे थे जिनको हम अपना आशियानावो तो माथे पर फ़क़त शिकन लाते हैं

तेरी उम्र नहीं अब रफ़ाक़तों की दरारहम-उम्रों को ज़माने के हुनर आते हैं

~दरार