daraar.

शेर

न जाने कौनसे रब्त कीरंजिश लिए बैठा हूँइश्क़ जो था ही नहींउसकी बंदिश लिए बैठा हूँ और कैसे मिल जाती है लोगों कोमोहब्बत ज़माने मेंमैं एक अरसे सेदिल लिए बैठा हूँ

~दरार