daraar
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Lekhan
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कविताएँ और शायरी
Kavitaayein aur shaayari
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शेर
वो ख़ूबसूरत था
मगर एक ख़याल था
दिखता रोज़ था
मगर उसकी मौजूदगी पर सवाल था
~दरार
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