अब वादा है फ़िराक़ से मेरादास्ताँ सुनाई नहीं जाएँगीदिल भरेगा, आँखें भरेंगीपर बातें लबों तक लाई नहीं जाएँगी ऐतबार-ओ-बग़ावत के सिलसिले बहुत हुएझूठी ही सही, ज़िंदा दिली दिखलाई नहीं जाएगीख़ुश्क अँधेरा, ख़ाली कमरे, दीवारों की सीलनमेरे बदन से अब सिर्फ़ वीरानियों की बू आएगी
~दरार