daraar.

मुक्त छंद

चाहत है इतनी कि तेरी क़बा हो जाएमैं बस साँस लूँ और तुमको वफ़ा हो जाएझूम उठे गुलज़ार ए दिलये फ़िज़ा रंगीन शाम हो जाए मैं तू बन जाऊँ,और तू मैं हो जाए

~दरार