एक क़िस्सा जिसके पहलू कईकुछ बातें सच्ची, कुछ झूठी थोड़ी थोड़ी तर्क-ए-ताल्लुक़ात की बाद-ए-सबा मेंकुछ इशारे, कुछ गुमनामी थोड़ी थोड़ी अपनी बैठक में अब हाल-ए-दिल को क्या ही महफ़ूज़ रखनाफिर वही शिकायतें, और तबाही थोड़ी थोड़ी
मुमकिन है उनकी महफ़िल में बदनामी हो हमारीहमने भी अपने इलाक़े में कोई कसर न छोड़ी
~दरार