daraar.

मुक्त छंद2026

एक पौधे की चका चौंध को देख के याद आयाये तो अभी बीज था, न जाने कहाँ से निकल आया जाने कैसे बढ़ जाता है आगे ज़िंदगी में लोगवो मुसाफ़िर न जाने कहाँ-कहाँ से निकल आया ये ख़याल ऐसे जहान का थाजहाँ हर रोज़ एक नया सूरज निकल आया

~दरार