daraar.

मुक्त छंद2026

ये शख़्स मेरे अंदर से निकल क्यों नहीं जातानिकल कर ये अपने घर क्यों नहीं जाताये मुझे मेरी तन्हाइयों के संग भी रहने नहीं देताऐ हमसफ़र तू मर क्यों नहीं जाता...

~दरार