ये उम्रें नहीं दिल तुड़वाने की ऐ दोस्तटूटा पड़ा है पुराना घर ऐ दोस्तकुछ ज़िम्मेदारियाँ माथे पर शिकन करने लगी हैंअब मोहब्बत से थोड़ी रुसवाई है दोस्त
~दरार
ये उम्रें नहीं दिल तुड़वाने की ऐ दोस्तटूटा पड़ा है पुराना घर ऐ दोस्तकुछ ज़िम्मेदारियाँ माथे पर शिकन करने लगी हैंअब मोहब्बत से थोड़ी रुसवाई है दोस्त
~दरार