daraar.

मुक्त छंद

तुम्हारी फ़ितरत हैजा जा कर वापस आने की क्या?पहला, दूसरा, तीसराकई रिश्ता निभाने की क्या?कैसे कर लेती हो सितम हम परकोई सज़ा नहीं है इसकी ज़माने में क्या?

वो जो रक़ीब है मेराशायद तुम्हें ख़ुश रखता होगा,पर तुम्हारी बेपरवाही कोसमझ सकता है क्या?गुज़रे लम्हे,गुज़री रातेंमेरी बाहों सा लिबास बन सकता है क्या? याद तो आता ही होगा