दिल को दिल बनाया मैंने
वो दौरजो तेरे संग बिताया मैंने जिसका जश्नसारे जहान में मनाया मैंने एक क़िस्सा जिसका तुझे इल्म नहींजिसके हर पल में तुझको पाया मैंने
वो ख़्वाबजो हर रात मेरे ख़्वाबों में आता रहा पर हक़ीक़तकभी उसे न बनाया मैंने अब कहाँ लौटेगा वो मुसाफ़िर, ऐ दरारजिसके लिएदिल को दिल बनाया मैंने
~दरार